श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  4.1.69 
शक्यो धारयितुं कामो भवेदभ्यागतो मया।
यदि भूयो वसन्तो मां न हन्यात् पुष्पितद्रुम:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
यदि यह पुष्पित वृक्षोंवाला वसन्त मुझ पर पुनः आक्रमण न करे, तो मैं किसी प्रकार कामवासना को अपने भीतर रोक सकूँगा ॥69॥
 
If this spring with its blooming trees does not attack me again, then I will somehow be able to keep the sexual urge within myself. ॥ 69॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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