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श्लोक 4.1.69  |
शक्यो धारयितुं कामो भवेदभ्यागतो मया।
यदि भूयो वसन्तो मां न हन्यात् पुष्पितद्रुम:॥ ६९॥ |
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| अनुवाद |
| यदि यह पुष्पित वृक्षोंवाला वसन्त मुझ पर पुनः आक्रमण न करे, तो मैं किसी प्रकार कामवासना को अपने भीतर रोक सकूँगा ॥69॥ |
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| If this spring with its blooming trees does not attack me again, then I will somehow be able to keep the sexual urge within myself. ॥ 69॥ |
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