श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  4.1.66 
पवनाहतवेगाभिरूर्मिभिर्विमलेऽम्भसि।
पङ्कजानि विराजन्ते ताडॺमानानि लक्ष्मण॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! पवन के झोंकों से तीव्र होती हुई लहरों से हिलते हुए कमल के पुष्प, पम्पा के स्वच्छ जल में अत्यन्त सुन्दर लगते हैं।
 
Lakshmana! The lotus flowers which are pounded by the waves which are accelerated by the gusts of wind, look very beautiful in the crystal clear waters of Pampa. 66.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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