श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  4.1.63 
एषा प्रसन्नसलिला पद्मनीलोत्पलायुता।
हंसकारण्डवाकीर्णा पम्पा सौगन्धिकायुता॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
'पम्पाक का जल अत्यन्त स्वच्छ है। उसमें लाल और नीले कमल खिले हुए हैं। हंस और करण्डव आदि पक्षी चारों ओर फैले हुए हैं और सुगन्धित कमल उसकी शोभा बढ़ा रहे हैं॥ 63॥
 
‘The water of Pampaka is very clean. Red lotus and blue lotus are blooming in it. Swans and birds like Karandava are spread all around and fragrant lotus are enhancing its beauty.॥ 63॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd