श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  4.1.60 
अमी लक्ष्मण दृश्यन्ते चूता: कुसुमशालिन:।
विभ्रमोत्सिक्तमनस: साङ्गरागा नरा इव॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! ये आम के वृक्ष मालाओं से सुशोभित होकर, चन्दन आदि अंगराग धारण किए हुए, श्रृंगार और विलास में मदमस्त मनुष्यों के समान प्रतीत होते हैं॥60॥
 
Laxman! These mango trees, adorned with garlands, look like human beings wearing cosmetics like sandalwood etc., intoxicated with adornment and luxury. 60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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