श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.1.6 
शोकार्तस्यापि मे पम्पा शोभते चित्रकानना।
व्यवकीर्णा बहुविधै: पुष्पै: शीतोदका शिवा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि मैं दुःख से पीड़ित हूँ, फिर भी मुझे यह पम्पा अत्यंत सुहावना लगता है। इसके निकट के वन अत्यंत विचित्र लगते हैं। यह नाना प्रकार के पुष्पों से आच्छादित है। इसका जल अत्यंत शीतल और सुखदायक प्रतीत होता है॥6॥
 
Even though I am suffering from grief, I find this Pampa very pleasant. The forests near it look very strange. It is covered with various kinds of flowers. Its water is very cool and it appears very soothing.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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