श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  4.1.59 
कामिनामयमत्यन्तमशोक: शोकवर्धन:।
स्तबकै: पवनोत्क्षिप्तैस्तर्जयन्निव मां स्थित:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
यह अशोक वृक्ष कामी मनुष्यों के लिए अत्यंत दुःखदायी है। यह अपने पुष्प-समूहों के साथ पवन के झोंकों में झूमता हुआ ऐसा खड़ा है मानो मुझे डाँट रहा हो।' 59
 
This Ashoka tree is extremely sorrowful for those who are lustful. It stands as if scolding me with its flower clusters swaying in the gusts of wind.' 59
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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