श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  4.1.56 
एष वै तत्र वैदेह्या विहग: प्रतिहारक:।
पक्षी मां तु विशालाक्ष्या: समीपमुपनेष्यति॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
यह वही पक्षी है जो आकाश में स्थित होकर वैदेही के हरण का संकेत करते हुए बोला था; किन्तु आज जिस प्रकार बोल रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह मुझे बड़े-बड़े नेत्रों वाली सीता के पास ले जाएगा॥ 56॥
 
This is the same bird which, when situated in the sky, spoke, indicating the abduction of Vaidehi; but the way it is speaking today, it seems that it will take me to Sita, the one with big eyes.॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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