श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  4.1.55 
तां विनाथ विहङ्गोऽसौ पक्षी प्रणदितस्तदा।
वायस: पादपगत: प्रहृष्टमभिकूजति॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
‘जब सीता मेरे साथ थीं, तब आकाश में कौआ काँव-काँव करता था, जो उनके भावी वियोग का सूचक था। अब सीता के वियोग के समय वह कौआ वृक्ष पर बैठा हुआ बड़े हर्ष से अपनी ही वाणी में काँव-काँव कर रहा है (इससे यह संकेत मिलता है कि सीता का मुझसे शीघ्र ही पुनर्मिलन होगा)॥ 55॥
 
‘When Sita was with me, the crow used to caw in the sky, which was indicative of her future separation. Now, at the time of Sita's separation, that crow is sitting on a tree and is croaking in its own voice with great joy (this indicates that Sita will be reunited with me very soon).॥ 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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