श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  4.1.52 
मयि भावो हि वैदेह्यास्तत्त्वतो विनिवेशित:।
ममापि भाव: सीतायां सर्वथा विनिवेशित:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में विदेहकुमारी का हार्दिक स्नेह मुझमें ही है और मेरा सम्पूर्ण प्रेम विदेहनन्दिनी सीता में ही केन्द्रित है॥ 52॥
 
‘In fact, Videha Kumari's heartfelt affection is for me and my complete love is completely centered on Videhanandini Sita.॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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