श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.1.5 
मां तु शोकाभिसंतप्तमाधय: पीडयन्ति वै।
भरतस्य च दु:खेन वैदेह्या हरणेन च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु इस समय मैं भरत के शोक और सीता के अपहरण की चिन्ता से व्याकुल हूँ। मानसिक वेदना मुझे महान् पीड़ा दे रही है॥5॥
 
‘But at this moment I am tormented by the grief of Bharata's sorrow and the worry of Sita's abduction. Mental agony is causing me great pain.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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