श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  4.1.49 
अथवा वर्तते तत्र वसन्तो यत्र मे प्रिया।
किं करिष्यति सुश्रोणी सा तु निर्भर्त्सिता परै:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
अथवा यह भी हो सकता है कि जहाँ मेरी प्रियतमा है, वहाँ भी इसी प्रकार वसन्त ऋतु फैल रही हो, किन्तु उसे शत्रुओं की फटकार सुननी पड़ेगी; तो वह बेचारी सुन्दरी सीता क्या कर सकती है?
 
Or it is possible that where my beloved is, there too spring is spreading like this, but she will have to listen to the rebukes of the enemies; so what can that poor beautiful Sita do?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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