श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  4.1.48 
नूनं न तु वसन्तस्तं देशं स्पृशति यत्र सा।
कथं ह्यसितपद्माक्षी वर्तयेत् सा मया विना॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जिस एकांत स्थान में सीता रहती हैं, वहाँ वसन्त ऋतु प्रवेश नहीं करती। फिर भी वह कमल-नयन वाली काली आँखों वाली सीता मेरे बिना कैसे जीवित रहेगी?'
 
Verily the solitary place where Sita is, spring does not enter that place. Yet how will that lotus-eyed Sita with her black eyes survive without me?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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