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श्लोक 4.1.48  |
नूनं न तु वसन्तस्तं देशं स्पृशति यत्र सा।
कथं ह्यसितपद्माक्षी वर्तयेत् सा मया विना॥ ४८॥ |
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| अनुवाद |
| जिस एकांत स्थान में सीता रहती हैं, वहाँ वसन्त ऋतु प्रवेश नहीं करती। फिर भी वह कमल-नयन वाली काली आँखों वाली सीता मेरे बिना कैसे जीवित रहेगी?' |
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| Verily the solitary place where Sita is, spring does not enter that place. Yet how will that lotus-eyed Sita with her black eyes survive without me?' |
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