श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.1.3 
सौमित्रे शोभते पम्पा वैदूर्यविमलोदका।
फुल्लपद्मोत्पलवती शोभिता विविधैर्द्रुमै:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! यह पम्पा कितना सुन्दर है? इसका जल वैदूर्यमणि के समान स्वच्छ और श्याम है। इसमें अनेक कमल और कुमुदिनियाँ खिली हुई हैं। इसके तटों पर उगे हुए नाना प्रकार के वृक्षों से इसकी शोभा और भी बढ़ जाती है॥3॥
 
‘Sumitra Nandan! How beautiful is this Pampa? Its water is as clean and dark as Vaidurya Mani. Many lotus and water lilies are blooming in it. Its beauty is further enhanced by the various types of trees growing on its banks.॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd