श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.1.27 
विमिश्रा विहगा: पुंभिरात्मव्यूहाभिनन्दिता:।
भृङ्गराजप्रमुदिता: सौमित्रे मधुरस्वरा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! देखो, ये पक्षीगण नर पक्षियों के साथ मिलकर झुंड में आनंद मना रहे हैं। भौंरों की गुंजन सुनकर प्रसन्न हो रहे हैं और स्वयं भी मधुर वाणी बोल रहे हैं॥ 27॥
 
Sumitra Nandan! Look, these female birds are enjoying themselves in the flock by uniting with the male birds. They are delighted to hear the humming of the bumble bees and are themselves speaking sweetly.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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