श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.1.24 
एष दात्यूहको हृष्टो रम्ये मां वननिर्झरे।
प्रणदन्मन्मथाविष्टं शोचयिष्यति लक्ष्मण॥ २४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! वन में सुन्दर जलप्रपात के पास हर्षपूर्वक कलरव करने वाला यह जलपक्षी मुझ सीता से मिलने की इच्छा रखने वाले राम को दुःखी कर रहा है॥ 24॥
 
Lakshmana! This water bird calling joyfully near the beautiful waterfall in the forest is making me, Rama, who desires to meet Sita, sad.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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