श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.1.22 
अयं वसन्त: सौमित्रे नानाविहगनादित:।
सीतया विप्रहीणस्य शोकसंदीपनो मम॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे सुमित्रानन्दन! नाना प्रकार के पक्षियों के कलरव से गूंजने वाला यह वसन्त ऋतु का मौसम सीता से वियोग होने के कारण मेरे लिए अधिक दुःख का कारण बन गया है॥ 22॥
 
O Sumitra Nandan! This spring season, resounding with the chirping of various birds, has become a cause of increasing grief for me due to being separated from Sita.॥ 22॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd