श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.1.18 
अमी पवनविक्षिप्ता विनदन्तीव पादपा:।
षट्पदैरनुकूजद्भिर्वनेषु मधुगन्धिषु॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मधुर रस और सुगन्ध से परिपूर्ण इन वनों में, मधुमक्खियों की गुंजन ध्वनि से हिलते हुए वृक्ष मानो नाचते हुए गा रहे हों॥18॥
 
‘In these forests filled with sweet nectar and fragrance, the trees shaken by the humming sound of the bees are as if singing along with dancing.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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