श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.1.16 
तेन विक्षिपतात्यर्थं पवनेन समन्तत:।
अमी संसक्तशाखाग्रा ग्रथिता इव पादपा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘जिन वृक्षों की शाखाएँ वायु के वेग से सब ओर से एक दूसरे को छूती हैं, वे मानो गुंथे हुए प्रतीत होते हैं।॥16॥
 
‘The trees whose branches touch each other on all sides due to the force of the wind, appear as if they are woven together.॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd