श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.1.14 
विक्षिपन् विविधा: शाखां नगानां कुसुमोत्कटा:।
मारुतश्चलितस्थानै: षट्पदैरनुगीयते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब वायु फूलों से लदे हुए वृक्षों की विभिन्न शाखाओं को हिलाती हुई आगे बढ़ती है, तब मधुमक्खियाँ अपने स्थान से विचलित होकर उसका गुणगान करती हुई उसके पीछे चलने लगती हैं ॥14॥
 
When the wind moves forward, shaking the various branches of trees laden with flowers, then the bees, disturbed from their places, start following it, singing its praises. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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