श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.1.13 
पतितै: पतमानैश्च पादपस्थैश्च मारुत:।
कुसुमै: पश्य सौमित्रे क्रीडतीव समन्तत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सुमित्राकुमार! उधर देखो, वायु उन सब फूलों के साथ खेल रही है जो वृक्षों से गिर गए हैं, गिर रहे हैं और जो अभी भी शाखाओं से लगे हुए हैं॥13॥
 
Sumitrakumar! Look over there, the wind is playing with all the flowers that have fallen from the trees, are falling and those that are still attached to the branches.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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