श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  4.1.129 
स तौ महात्मा गजमन्दगामी
शाखामृगस्तत्र चरंश्चरन्तौ।
दृष्ट्वा विषादं परमं जगाम
चिन्तापरीतो भयभारभग्न:॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
हाथी के समान धीरे-धीरे चलने वाले महाबली वानरराज सुग्रीव वहाँ विचरण कर रहे थे, और उन दोनों भाइयों को साथ-साथ आगे बढ़ते देखकर चिन्तित हो गए। भय के भारी बोझ से उनका उत्साह नष्ट हो गया। वे महान शोक में पड़ गए॥129॥
 
The great monkey king Sugreeva, who walks as slowly as an elephant and was wandering there, became worried on seeing the two brothers advancing together. His enthusiasm was destroyed by the heavy burden of fear. He fell into great sorrow.॥129॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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