श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  4.1.128 
तावृष्यमूकस्य समीपचारी
चरन् ददर्शाद्भुतदर्शनीयौ।
शाखामृगाणामधिपस्तरस्वी
वितत्रसे नैव विचेष्ट चेष्टाम्॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
ऋष्यमूक पर्वत के निकट विचरण करने वाले महाबली वानरराज सुग्रीव पंपा के निकट विचरण कर रहे थे। उस समय उन्होंने उन अद्भुत एवं सुंदर योद्धाओं श्री राम और लक्ष्मण को देखा। उन्हें देखते ही उन्हें भय हुआ कि कहीं मेरे शत्रु बालि ने इन्हें नहीं भेजा है। तब वे इतने भयभीत हो गए कि खाने-पीने का भी प्रयत्न न कर सके॥128॥
 
The powerful monkey king Sugreeva who roamed near the Rishyamuk mountain was roaming near Pampa. At that time he saw those wonderful and beautiful warriors Shri Ram and Lakshman. As soon as he saw them, he feared that maybe my enemy Vali has sent them. Then he became so scared that he could not even try to eat or drink.॥128॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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