श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  4.1.124 
एवं सम्बोधितस्तेन शोकोपहतचेतन:।
त्यज्य शोकं च मोहं च रामो धैर्यमुपागमत्॥ १२४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के इस प्रकार समझाने पर दुःख से व्याकुल श्री राम ने शोक और मोह त्यागकर धैर्य धारण किया।
 
After being explained in this manner by Lakshman, Sri Rama, who was distressed with grief, abandoned his grief and attachment and maintained patience.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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