श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  4.1.120 
स्वास्थ्यं भद्रं भजस्वार्य त्यज्यतां कृपणा मति:।
अर्थो हि नष्टकार्यार्थैरयत्नेनाधिगम्यते॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
अतः हे आर्य! तुम कल्याणकारी धैर्य धारण करो। उस अपमानजनक विचार को त्याग दो। जिनके पुरुषार्थ और धन नष्ट हो गए हैं, वे यदि उत्साहपूर्वक कार्य नहीं करते, तो वे अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते।॥120॥
 
‘Therefore, Arya! You should adopt the beneficial patience. Give up that humiliating thought. Those people whose efforts and wealth have been wasted, if they do not work enthusiastically, then they cannot achieve the desired goal. ॥ 120॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd