श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.1.12 
प्रस्तरेषु च रम्येषु विविधा: काननद्रुमा:।
वायुवेगप्रचलिता: पुष्पैरवकिरन्ति गाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘वन के नाना प्रकार के वृक्ष वायु के वेग से झूमते हुए सुन्दर शिलाओं पर पुष्प वर्षा करते हैं और यहाँ की भूमि को ढक लेते हैं।॥12॥
 
‘The various trees of the forest, swaying in the force of the wind, shower flowers on the beautiful rocks and cover the ground here.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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