श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  4.1.118 
प्रवृत्तिर्लभ्यतां तावत् तस्य पापस्य रक्षस:।
ततो हास्यति वा सीतां निधनं वा गमिष्यति॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
पहले उस पापी राक्षस को खोजो, फिर या तो वह सीता को लौटा देगा, या अपने प्राण गँवा देगा॥118॥
 
‘First find that sinful demon. Then either he will return Sita or he will lose his life.॥ 118॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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