श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  4.1.115 
संस्तम्भ राम भद्रं ते मा शुच: पुरुषोत्तम।
नेदृशानां मतिर्मन्दा भवत्यकलुषात्मनाम्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषोत्तम श्री राम! आपका कल्याण हो। अपना ध्यान रखें। शोक न करें। आप जैसे पुण्यात्मा पुरुषों की बुद्धि कभी उत्साह से रहित नहीं होती ॥115॥
 
‘Purushottam Shri Ram! May you be blessed. Take care of yourself. Do not grieve. The intellect of virtuous men like you never becomes devoid of enthusiasm. ॥ 115॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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