श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  4.1.112 
किं नु वक्ष्याम्ययोध्यायां कौसल्यां हि नृपात्मज।
क्व सा स्नुषेति पृच्छन्तीं कथं चापि मनस्विनीम्॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार! जब हम लोग अयोध्या जाएँगे, तब बुद्धिमान माता कौशल्या जब हमसे पूछेंगी कि, 'मेरी पुत्रवधू कहाँ है?' तब मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगा?॥112॥
 
Prince! When we go to Ayodhya, when the intelligent mother Kausalya asks us, 'Where is my daughter-in-law?' what answer will I give her?॥ 112॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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