श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  4.1.107 
या मामनुगता मन्दं पित्रा प्रस्थापितं वनम्।
सीता धर्मं समास्थाय क्व नु सा वर्तते प्रिया॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
हाय! इस समय मेरी वह प्रियतमा कहाँ है, जो पिता के द्वारा वन में भेजे जाने पर धर्म की शरण लेकर मेरे पीछे-पीछे यहाँ आई थी?॥107॥
 
Alas! Where is my beloved at this time, who followed me here taking refuge in Dharma after being sent to the forest by her father?॥ 107॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd