श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  4.1.103 
जीवेयं खलु सौमित्रे मया सह सुमध्यमा।
सेवेत यदि वैदेही पम्पाया: पवनं शुभम्॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानन्दन! यदि सुमध्यमा सीता मेरे साथ रहकर इस पंपासरोवर के तट पर सुखद वायु का आनंद ले सकें, तो मैं अवश्य जीवित रह सकता हूँ॥103॥
 
Sumitra Nandan! If Sumadhyma Sita can stay with me and enjoy the pleasant breeze on the banks of this Pampasarovar, then I can certainly survive.॥ 103॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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