श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.1.10 
सुखानिलोऽयं सौमित्रे काल: प्रचुरमन्मथ:।
गन्धवान् सुरभिर्मासो जातपुष्पफलद्रुम:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! इस समय मन्द-मन्द सुखद वायु बह रही है, जो कामना को उत्तेजित कर रही है (सीताजी के दर्शन की इच्छा प्रबल हो गई है)। चैत्र मास है। वृक्षों में फूल और फल खिल गए हैं और चारों ओर सुखद सुगन्ध फैल रही है॥ 10॥
 
‘Sumitra Nandan! At this time a gentle pleasant breeze is blowing, which is stimulating desire (the desire to see Sita has become strong). This is the month of Chaitra. Flowers and fruits have bloomed in the trees and a pleasant fragrance is spreading all around.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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