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ramayan 3.9.32: सौम्य! प्रतिदिन शुद्ध मन से तपोवन में धार्मिक अनुष्ठान करो। तीनों लोकों में जो कुछ भी विद्यमान है, उसे तुम पहले से ही यथार्थ रूप में जानते हो।॥32॥   |   ramayan सर्ग 3.9: सीता का श्रीराम से निरपराध प्राणियों को न मारने और अहिंसा-धर्म का पालन करने के लिये अनुरोध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.9.32 
नित्यं शुचिमति: सौम्य चर धर्मं तपोवने।
सर्वं तु विदितं तुभ्यं त्रैलोक्यामपि तत्त्वत:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! प्रतिदिन शुद्ध मन से तपोवन में धार्मिक अनुष्ठान करो। तीनों लोकों में जो कुछ भी विद्यमान है, उसे तुम पहले से ही यथार्थ रूप में जानते हो।॥32॥
 
'Soumya! Perform religious rituals in the Tapovan with a pure mind every day. Whatever exists in the three worlds, you already know it in its true form. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)