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श्लोक 3.9.30  |
धर्मादर्थ: प्रभवति धर्मात् प्रभवते सुखम्।
धर्मेण लभते सर्वं धर्मसारमिदं जगत्॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| धर्म से ही धन की प्राप्ति होती है, धर्म से ही सुख की प्राप्ति होती है और धर्म से ही मनुष्य को सब कुछ प्राप्त होता है। इस संसार में धर्म ही एकमात्र सार है॥30॥ |
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| ‘Wealth is obtained through Dharma, happiness arises through Dharma and man gets everything through Dharma. Dharma is the only essence in this world.॥ 30॥ |
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