Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.9.29: 'राज्य छोड़कर वन में आकर यदि आप संन्यासी रहेंगे तो इससे मेरे सास-ससुर को शाश्वत सुख प्राप्त होगा ॥29॥   |   ramayan सर्ग 3.9: सीता का श्रीराम से निरपराध प्राणियों को न मारने और अहिंसा-धर्म का पालन करने के लिये अनुरोध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 9: सीता का श्रीराम से निरपराध प्राणियों को न मारने और अहिंसा-धर्म का पालन करने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.9.29 
अक्षया तु भवेत् प्रीति: श्वश्रूश्वशुरयोर्मम।
यदि राज्यं हि संन्यस्य भवेस्त्वं निरतो मुनि:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'राज्य छोड़कर वन में आकर यदि आप संन्यासी रहेंगे तो इससे मेरे सास-ससुर को शाश्वत सुख प्राप्त होगा ॥29॥
 
'After leaving the kingdom and coming to the forest, if you remain a monk, it will bring eternal happiness to my mother-in-law and father-in-law. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)