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श्लोक  3.9.26 
क्षत्रियाणां तु वीराणां वनेषु नियतात्मनाम्।
धनुषा कार्यमेतावदार्तानामभिरक्षणम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'अपने मन और इन्द्रियों को वश में करने वाले योद्धा क्षत्रियों के लिए वन में धनुष धारण करने का एकमात्र उद्देश्य संकटग्रस्त प्राणियों की रक्षा करना है।॥ 26॥
 
'For the warrior Kshatriyas who have controlled their mind and senses, the only purpose of carrying the bow in the forest is to protect the creatures in distress.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)