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श्लोक  3.9.17 
तस्यैव तपसो विघ्नं कर्तुमिन्द्र: शचीपति:।
खड्गपाणिरथागच्छदाश्रमं भटरूपधृक् ॥ १ ७॥
 
 
अनुवाद
उनकी तपस्या में विघ्न डालने के लिए एक दिन शचीपति इंद्र ने योद्धा का रूप धारण किया और हाथ में तलवार लेकर उनके आश्रम में आ पहुंचे।
 
To disturb his penance, Sachipati Indra one day took the form of a warrior and came to his ashram with a sword in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)