vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 9: सीता का श्रीराम से निरपराध प्राणियों को न मारने और अहिंसा-धर्म का पालन करने के लिये अनुरोध
»
श्लोक 16
श्लोक
3.9.16
पुरा किल महाबाहो तपस्वी सत्यवान् शुचि:।
कस्मिंश्चिदभवत् पुण्ये वने रतमृगद्विजे॥ १६॥
अनुवाद
महाबाहो! प्राचीन काल की कथा है, एक पवित्र वन में, जहाँ मृग और पक्षी सुखपूर्वक रहते थे, एक सत्यवादी और धर्मात्मा तपस्वी रहता था ॥16॥
'Mahabaho! It is a story of old times, in a sacred forest, where deer and birds lived happily, there lived a truthful and pious ascetic. ॥16॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd