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श्लोक 3.9.13  |
नहि मे रोचते वीर गमनं दण्डकान् प्रति।
कारणं तत्र वक्ष्यामि वदन्त्या: श्रूयतां मम॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| वीर! इस समय तुम्हारा दण्डकारण्य में जाना मुझे अच्छा नहीं लग रहा है। मैं तुम्हें इसका कारण बताता हूँ, कृपया उसे मुझसे सुनो॥13॥ |
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| ‘Veer! I don't like your going to Dandakaranya at this time. I am telling you the reason for this; please listen to it from me.॥ 13॥ |
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