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ramayan 3.74.35: मन को एकाग्र करके वह उस पवित्र स्थान पर गया जहाँ उसके गुरु, पुण्यात्मा ऋषि निवास करते थे ॥ 35॥   |   ramayan सर्ग 3.74: श्रीराम और लक्ष्मण का पम्पासरोवर के तट पर मतङ्गवन में शबरी के आश्रम पर जाना, शबरी का अपने शरीर की आहुति दे दिव्यधाम को प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 74: श्रीराम और लक्ष्मण का पम्पासरोवर के तट पर मतङ्गवन में शबरी के आश्रम पर जाना, शबरी का अपने शरीर की आहुति दे दिव्यधाम को प्रस्थान करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.74.35 
यत्र ते सुकृतात्मानो विहरन्ति महर्षय:।
तत् पुण्यं शबरी स्थानं जगामात्मसमाधिना॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
मन को एकाग्र करके वह उस पवित्र स्थान पर गया जहाँ उसके गुरु, पुण्यात्मा ऋषि निवास करते थे ॥ 35॥
 
Concentrating his mind, he travelled to that holy place where his guru, the pious sage, used to reside. ॥ 35॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे चतु:सप्ततितम: सर्ग: ॥ ७ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें चौहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ ४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)