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ramayan 3.74.29: अब मैं उन शुद्धात्मा मुनियों के पास जाना चाहती हूँ, जिनका यह आश्रम है और जिनके चरणों की मैं दासी रही हूँ।॥29॥   |   ramayan सर्ग 3.74: श्रीराम और लक्ष्मण का पम्पासरोवर के तट पर मतङ्गवन में शबरी के आश्रम पर जाना, शबरी का अपने शरीर की आहुति दे दिव्यधाम को प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 74: श्रीराम और लक्ष्मण का पम्पासरोवर के तट पर मतङ्गवन में शबरी के आश्रम पर जाना, शबरी का अपने शरीर की आहुति दे दिव्यधाम को प्रस्थान करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.74.29 
तेषामिच्छाम्यहं गन्तुं समीपं भावितात्मनाम्।
मुनीनामाश्रमो येषामहं च परिचारिणी॥ २९॥
 
 
अनुवाद
अब मैं उन शुद्धात्मा मुनियों के पास जाना चाहती हूँ, जिनका यह आश्रम है और जिनके चरणों की मैं दासी रही हूँ।॥29॥
 
Now I wish to go to those pure souled sages, whose hermitage this is and whose feet I have been a maidservant to.'॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)