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श्लोक 3.74.29  |
तेषामिच्छाम्यहं गन्तुं समीपं भावितात्मनाम्।
मुनीनामाश्रमो येषामहं च परिचारिणी॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| अब मैं उन शुद्धात्मा मुनियों के पास जाना चाहती हूँ, जिनका यह आश्रम है और जिनके चरणों की मैं दासी रही हूँ।॥29॥ |
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| Now I wish to go to those pure souled sages, whose hermitage this is and whose feet I have been a maidservant to.'॥ 29॥ |
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