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श्लोक 3.74.26  |
कृताभिषेकैस्तैर्न्यस्ता वल्कला: पादपेष्विह।
अद्यापि न विशुष्यन्ति प्रदेशे रघुनन्दन॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| रघुनन्दन! इसमें स्नान करके उन्होंने वृक्षों पर जो छाल के वस्त्र बिछाए थे, वे अब तक इस क्षेत्र में नहीं सूखे हैं॥ 26॥ |
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| Raghunandan! After bathing in it, the bark clothes which he had spread on the trees have not dried in this region till now.॥ 26॥ |
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