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इयं प्रत्यक्स्थली वेदी यत्र ते मे सुसत्कृता:।
पुष्पोपहारं कुर्वन्ति श्रमादुद्वेपिभि: करै:॥ २३॥
अनुवाद
यह प्रत्यक्षस्थली नाम की वेदी है, जहाँ मेरे द्वारा भलीभाँति पूजित वे महामुनि वृद्धावस्था के कारण काँपते हुए हाथों से देवताओं को पुष्प अर्पित करते थे॥ 23॥
This is the altar called Pratyaksthali, where that great sage, who was well worshipped by me, used to offer flowers to the gods with his hands trembling with fatigue due to old age.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥