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श्लोक 3.73.41-42h  |
तस्यां वसति धर्मात्मा सुग्रीव: सह वानरै:॥ ४१॥
कदाचिच्छिखरे तस्य पर्वतस्यापि तिष्ठति। |
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| अनुवाद |
| पुण्यात्मा सुग्रीव वानरों के साथ उसी गुफा में रहते हैं। वे कभी-कभी उस पर्वत की चोटी पर भी रहते हैं।॥41 1/2॥ |
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| ‘The virtuous Sugreeva lives in the same cave with the monkeys. He sometimes lives on the top of that mountain as well.'॥ 41 1/2॥ |
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