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श्लोक 3.73.22-23h  |
न तानि कश्चिन्माल्यानि तत्रारोपयिता नर:॥ २२॥
न च वै म्लानतां यान्ति न च शीर्यन्ति राघव। |
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| अनुवाद |
| 'रघुनन्दन! कोई भी मनुष्य उन पुष्पों को उतारकर धारण नहीं करता। (क्योंकि वहाँ कोई पहुँच ही नहीं सकता) पंपासरोवर के पुष्प न तो मुरझाते हैं और न गिरते हैं॥ 22 1/2॥ |
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| ‘Raghunandan! No human being takes off those flowers and wears them. (Because no one can reach there) The flowers of Pampasarovar neither fade nor fall.॥ 22 1/2॥ |
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