श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 73: दिव्य रूपधारी कबन्ध का श्रीराम और लक्ष्मण को ऋष्यमूक और पम्पासरोवर का मार्ग बताना तथा मतङ्गमुनि के वन एवं आश्रम का परिचय देकर प्रस्थान करना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  3.73.21-22h 
सुमनोभिश्चितास्तत्र तिलका नक्तमालका:॥ २१॥
उत्पलानि च फुल्लानि पङ्कजानि च राघव।
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! वहाँ फूलों से भरे तिलक और नक्तमल के वृक्ष सुन्दर दिखाई देते हैं तथा जल के भीतर कमल और कुमुदिनी के फूल खिले हुए दिखाई देते हैं।'
 
‘Raghunandan! The Tilak and Naktmal trees filled with flowers look beautiful there and the lotus and lily flowers are seen blooming inside the water. 21/2.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd