श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 73: दिव्य रूपधारी कबन्ध का श्रीराम और लक्ष्मण को ऋष्यमूक और पम्पासरोवर का मार्ग बताना तथा मतङ्गमुनि के वन एवं आश्रम का परिचय देकर प्रस्थान करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.73.2 
एष राम शिव: पन्था यत्रैते पुष्पिता द्रुमा:।
प्रतीचीं दिशमाश्रित्य प्रकाशन्ते मनोरमा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! यहाँ से पश्चिम दिशा में शरण लो, जहाँ ये पुष्पों से भरे हुए सुन्दर वृक्ष शोभायमान हो रहे हैं, यही तुम्हारे जाने का सुखद मार्ग है॥ 2॥
 
Shri Ram! From here, take shelter in the west direction where these beautiful trees full of flowers are looking beautiful, this is the pleasant route for you to go.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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