श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 73: दिव्य रूपधारी कबन्ध का श्रीराम और लक्ष्मण को ऋष्यमूक और पम्पासरोवर का मार्ग बताना तथा मतङ्गमुनि के वन एवं आश्रम का परिचय देकर प्रस्थान करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.73.1 
दर्शयित्वा तु रामाय सीताया: परिमार्गणे।
वाक्यमन्वर्थमर्थज्ञ: कबन्ध: पुनरब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
राम को सीता को खोजने का मार्ग बताकर अर्थशास्त्री कबंध ने पुनः उनसे यह उपयोगी बात कही -॥1॥
 
Having shown Rama the way to find Sita, the economist Kabandha once again told him the following useful thing -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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