| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 72: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा चिता की आग में कबन्ध का दाह तथा उसका दिव्य रूप में प्रकट होकर उन्हें सग्रीव से मित्रता करने के लिये कहना » श्लोक 7-8 |
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| | | | श्लोक 3.72.7-8  | शृणु राघव तत्त्वेन यथा सीतामवाप्स्यसि॥ ७॥
राम षड् युक्तयो लोके याभि: सर्वं विमृश्यते।
परिमृष्टो दशान्तेन दशाभागेन सेव्यते॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘रघुनन्दन! मैं तुम्हें सीताजी को प्राप्त करने का यथार्थ उपाय बता रहा हूँ, सुनो। श्री राम! संसार में छह विधियाँ हैं, जिनके द्वारा राजा सब कुछ प्राप्त कर लेते हैं (उन विधियों और उपायों के नाम हैं- संधि, वियोग, वाहन, आसन, द्वैत और आश्रय)। जो मनुष्य किसी बुरी स्थिति में पड़ा हुआ है, वह किसी बुरी स्थिति में पड़े हुए व्यक्ति से सेवा या सहायता प्राप्त करता है (यह नीति है)।॥ 7-8॥ | | | | ‘Raghunandan! I am telling you the exact way in which you can get Sita, listen. Shri Ram! There are six methods in the world, by which kings get everything (the names of those methods and ways are- treaty, separation, vehicle, seat, duality and shelter*). A person who is suffering from a bad condition, he gets service or help from another person suffering from a bad condition (this is the policy).॥ 7-8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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