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श्लोक 3.72.2  |
लक्ष्मणस्तु महोल्काभिर्ज्वलिताभि: समन्तत:।
चितामादीपयामास सा प्रजज्वाल सर्वत:॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| लक्ष्मण ने बड़ी-बड़ी लकड़ियाँ लेकर चिता को चारों ओर से जलाया; तब वह सब ओर से जलने लगी॥ 2॥ |
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| Lakshmana lit the pyre on all sides using large burning sticks; then it started blazing from all sides.॥ 2॥ |
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