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श्लोक 3.72.18  |
अद्रोहाय समागम्य दीप्यमाने विभावसौ।
न च ते सोऽवमन्तव्य: सुग्रीवो वानराधिप:॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| प्रज्वलित अग्नि को साक्षी मानकर मित्रता करो और आपस में विश्वासघात से दूर रहो। ऐसा करने के बाद तुम वानरराज सुग्रीव का कभी अपमान मत करना॥18॥ |
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| Make friendship with the blazing fire as witness and avoid betrayal among yourselves. After doing so you must never insult the monkey king Sugreeva.॥ 18॥ |
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